कोहली के विराट होने का इंतज़ार

माना जाता है कि सौरव गांगुली, जो ख़ुद कभी बहुत ही ख़राब तरीक़े से टीम से बाहर किये गये थे; कोहली के बयान से नाराज़ हुए। इसके बाद बतौर एक कप्तान बोर्ड से जो समर्थन मिलना चाहिए, वह कोहली को नहीं मिला। टी-20 आईसीसी ट्रॉफी में भारत की हार के बाद कोहली के ऊपर दवाब बनाया जाने लगा था। बतौर बल्लेबाज़ भी कोहली सफल नहीं हो रहे थे। पिछले क़रीब दो साल में कोहली एक भी शतक नहीं बना पाये हैं। इसे लेकर भी उनकी निंदा करने वाले सक्रिय हो चुके थे। अब दक्षिण अफ्रीका से सीरीज 1-2 से हारने के बाद अचानक कोहली का बतौर टेस्ट कप्तान भी इस्तीफ़ा सामने आ गया।

किसी समय उनके मज़बूत समर्थक रहे पूर्व कोच रवि शास्त्री के भी नहीं होने के बाद कोहली टीम में कमोवेश अकेले से पड़ गये थे। वह अलग बात है कि कोहली और शास्त्री की जोड़ी ने भारतीय टीम को कामयाबी के ऊँचाइयों पर पहुँचाया।

ट्वीट से दी जानकारी

किंग कोहली के नाम के मशहूर विराट कोहली ने भारतीय क्रिकेट की टेस्ट टीम की कप्तानी छोडऩे की सूचना एक भावुक ट्वीट करके दी। उनके इस ऐलान के बाद बीसीसीआई के अध्यक्ष सौरव गांगुली ने ट्वीट कर विराट कोहली की तारीफ़ की। गांगुली ने लिखा- ‘विराट के नेतृत्व में भारतीय क्रिकेट ने खेल के सभी प्रारूपों में तेज़ी से प्रगति की है। उनका फ़ैसला निजी है और बीसीसीआई इसका बहुत सम्मान करता है। वह भविष्य में इस टीम को नयी ऊँचाइयों पर ले जाने के लिए एक महत्त्वपूर्ण सदस्य होंगे। वह एक महान् खिलाड़ी हैं। उन्होंने अच्छा किया।’

टीम इंडिया की कप्तानी छोड़ते हुए विराट ने एमएस धोनी को विशेषतौर पर शुक्रिया कहा। विराट ने लिखा- ‘ये सात साल की कड़ी मेहनत, लगन और कठोर परिश्रम का नतीजा है। मैंने हर रोज़ टीम को सही दिशा में पहुँचाने की कोशिश की। इस दौरान मैंने अपना काम पूरी ईमानदारी और निष्ठा के साथ किया और अपनी तरफ़ से कोई क़सर नहीं छोड़ी। हर सफ़र कहीं-न-कहीं एक दिन ख़त्म होता है। मेरे भारतीय टेस्ट टीम के कप्तान के रूप में सफ़र यहीं समाप्त होता है। कप्तानी के इस सफ़र में बहुत से उतार-चढ़ाव आये; लेकिन मेरे प्रयास और विश्वास में कहीं कोई कमी नहीं आयी। मैंने इस दौरान जो कुछ किया, उसमें अपनी ओर से 120 फ़ीसदी योगदान देने की कोशिश की। अगर मैं ऐसा नहीं सकता हूँ, तो समझता हूँ कि ये मेरे लिए सही नहीं है। मेरे दिल में पूरी साफ़गोर्इ है और मैं अपनी टीम के लिए बेईमान नहीं हो सकता।’

कोहली ने ट्वीट में कहा- ‘मैं इतने लम्बे समय कर देश का नेतृत्व का मौक़ा देने के लिए बीसीसीआई का शुक्रिया अदा करता हूँ। मैं टीम के साथी खिलाडिय़ों का ख़ासतौर पर शुक्रिया अदा करना चाहता हूँ, जिन्होंने पहले दिन से मेरे विजन को पूरा करने में मदद की। उन्होंने हर परिस्थिति में मेरा साथ दिया और कभी हथियार नहीं डाले। आप लोगों ने मेरी कप्तानी के सफ़र को ख़ूबसूरत और यादगार बनाया। हमारी गाड़ी को रवि भाई और उनका सपोर्ट स्टाफ (सहकर्मी) इंजन की तरह टेस्ट क्रिकेट में लगातार ऊँचाई पर ले गया। इस सपने को हक़ीक़त में तब्दील करने में आप सभी का बड़ा योगदान रहा। अन्त में एम.एस. धोनी का बहुत-बहुत शुक्रिया, जिन्होंने बतौर कप्तान मुझ पर भरोसा जताया और पाया कि मेरे अन्दर भारतीय क्रिकेट को आगे ले जाने की क्षमता है।’

बतौर कप्तान कोहली का सफ़र

कोहली ने 68 टेस्ट मैचों में भारतीय टीम का नेतृत्व किया, जिसमें 40 में टीम को सफलता मिली। वह टेस्ट में भारत के सबसे सफल कप्तान हैं। सन् 2018 बॉर्डर गावस्कर ट्रॉफी में कोहली की कप्तानी में टीम इंडिया ने पहली बार ऑस्ट्रेलिया को 2-1 से सीरीज में हराया। वहीं इंग्लैंड में हुई सीरीज में भी भारत 2-1 से आगे रहा (कोरोना के चलते यह सीरीज स्थगित हो गयी) और इसका एक मैच होना बाक़ी है। अन्य कामयाब कप्तानों की बात करें, तो धोनी की कप्तानी में भारत ने 61 में से 27 टेस्ट जीते, जबकि गांगुली ने 49 टेस्ट में भारत का नेतृत्व किया। इनमें से वह टीम को 21 मैचों में जीत दिला सके। कोहली का बतौर कप्तान टेस्ट में जीत का फ़ीसदी 58.82 फ़ीसदी रहा, जबकि मोहम्मद अजहरुद्दीन और सुनील गावस्कर का जीत का फ़ीसदी क्रमश: 29.78 और 19.14 फ़ीसदी ही था। यही नहीं, विराट कोहली ने बतौर कप्तान 68 मैचों में 54.80 के शानदार औसत से 5,864 रन बनाये। इस दौरान उन्होंने 20 शतक और 18 अद्र्धशतक जड़े। कोहली टेस्ट क्रिकेट में बतौर कप्तान भारत के लिए सबसे ज़्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाज़ भी रहे। टेस्ट कप्तान के रूप में उन्होंने सन् 2019 में दक्षिण अफ्रीका के ख़िलाफ़ नाबाद 254 रन की पारी खेली।