किसानों पर पैनी नज़र

 

 

बच्चे की गिरफ़्तारी
इस किसान आन्दोलन में पुलिस की ज़्यादतियाँ कम नहीं हैं; लेकिन एक 11 साल के किसान पुत्र को गिरफ़्तार करना पुलिस के चाल-चरित्र पर सन्देह पैदा करता है। सिरसा में पाँच किसानों की रिहाई को लेकर आन्दोलन में भाग लेने वाले किसान पुत्र को पुलिस ने गिरफ़्तार करके अंग्रेजों की पुलिस से क्रूरतम चेहरा दिखाया। गिरफ़्तारी के बाद बच्चे ने कहा- ‘चाहे मेरी मौत हो जाए, पर किसान सिंघु बॉर्डर पर आन्दोलन नहीं रुकना चाहिए। किसानों के अधिकारों के ख़ातिर और अपनी माँगों के लिए मैं अपनी जान की चिन्ता नहीं करूँगा।’ इससे किसानों और किसान समर्थकों और निष्पक्ष लोगों का ग़ुस्सा सोशल मीडिया पर फूट पड़ा। घटनास्थल पर मौज़ूद किसान भोला सिंह और किसान हरगोविन्द ने बताया कि पुलिस भले ही परेशान कर ले, चाहे देशद्रोह का मुक़दमा दर्ज कर ले या अन्य धाराएँ लगा दे; लेकिन किसानों का आन्दोलन तीनों कृषि क़ानूनों की वापस तक ख़त्म नहीं होगा। अब किसान आन्दोलन एक नये मोड़ पर है, जहाँ किसान और सरकार के बीच विकट तनाव की स्थिति बनी हुई है।