काले कानून ने कराई किरकिरी?

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क्या है अध्यादेश

पिछले सितंबर में दागी लोकसेवकों को संरक्षण देने के लिए दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) और भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) में अध्यादेश के जरिए संशोधन कर चुकी राज्य सरकार इसे स्थायी बनाने के लिए सोमवार 23 अक्टूबर को शुरू हुए विधानसभा सत्र में विधेयक लाने की पूरी तैयारिंया कर चुकी थी। इसे संशोधन में आईपीसी की धारा 228 में 228 बी जोड़कर प्रावधान किया गया कि, सीआरपीसी की धारा 156 (3) और धारा 190 (1) (सी) के विपरीत कार्य किया गया तो दो साल का कारावास और असीमित जुर्माने की सजा दी जा सकती है। न्यायाधीश मजिस्ट्रेट व लोकसेवक के खिलाफ अभियोजन स्वीकृति मिलने से पहले उनका नाम तथा अन्य जानकारी का प्रकाशन और प्रसारण नहीं हो सकेगा। इसमें यह भी जोड़ा गया है कि 6 माह में अभियोजन स्वीकृति पर निर्णय करना होगा, अन्यथा स्वत: स्वीकृति मान ली जाएगी। अभियोजन स्वीकृति मिलने तक ब्योरा सार्वजनिक नहीं किया जा सेकगा। इस विधेयक के मुताबिक सीआरपीसी की धारा 156 (3) और 190 के तहत मजिस्ट्रेट अभियोजन स्वीकृति से पहले ना तो जांच का आदेश दे पाएंगे और ना ही प्रसंज्ञान ले पाएंगे।

‘लाभ का पद’ बचाया?

राज्य सरकार लोकसेवकों को संरक्षण की आड़ में जनता की आवाज दबाने में तो कामयाब नहीं हो पाई, लेकिन विधायकों के लिए ‘लाभ का पदÓ बचा लिया है। सरकार ने राजस्थान विधानसभा सदस्य (निरर्हता-निवारण) विधेयक 2017 पारित करवा लिया। इसके तहत संसदीय सचिव, बोर्ड, निगम, समिति प्राधिकरण के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष या निदेशक के पद पर बैठा विधायक लाभ के पद के आधार पर अयोग्य नहीं होगा। भाजपा विधायक घनश्याम तिवाड़ी ने कहा,’विधेयक के रूप में यह चोर दरवाजे से मंत्री बनने का रास्ता है। दिल्ली या असम के मुख्यमंत्री संसदीय सचिव नियुक्त नहीं कर सकते तो हमारी ‘सीएमÓ के कौन से तारे लगे हुए हैं? तिवाड़ी ने कहा कि, ‘पिछली 26 जुलाई को ही सुप्रीम कोर्ट ने इसे असंवैधानिक बताया था। उन्होंने कहा,’मुख्यमंत्री को विधायकों में से संसदीय सचिव, या बोर्ड-निगम का अध्यक्ष बनाने का अधिकार नहीं है। देश के आठ हाईकोर्ट भी इस तरह का निर्णय दे चुके हैं।Ó जवाब में संसदीय मंत्री राजेन्द्र राठौड़ का कहना था कि यह विधेयक संसदीय सचिव पद पर नियुक्ति के लिए नहीं है। यह केवल घोषित करता है कि, ‘कोई विधायक संसदीय सचिव, नियुक्त हो जाता है तो वह अयोग्य नहीं हो जाता है। उन्होंने कहा, सरकार की मंशा पुराने विधेयकों को एक करने की थी जो किया है।

 तिवाड़ी ने कहा,’थूक कर चाट लिया’!

भ्रष्ट लोकसेवकों को बचाने के भाजपा सरकार के दांव-पेच के धुर्रे उड़ाने के घमासान में गृहमंत्री गुलाब चंद कटारिया और भाजपा के तेज तर्रार विधायक घनश्याम तिवाड़ी पूरी तरह एक दूसरे के निशाने पर रहे। विधेयक को लेकर बेकफुट पर आई सरकार पर करारे तंज कसने में तिवाड़ी ने कोई कसर नहीं छोड़ी। कटारिया और तिवाड़ी के बीच करीब 15 मिनट तक चली शाब्दिक तीरंदाजी में तिवाड़ी ने तो यहां तक कह डाला कि,’पहले थूका क्यों? और अब थूक कर चाटा क्यों? तिवाड़ी को दूसरे दिन भी विधेयक पर बोलने का मौका नहीं दिया, इसी दौरान गृहमंत्री कटारिया बोल रहे थे तो तिवाड़ी भी तीखे अंदाज में बोलते रहे। कटारिया का कहना था कि,’मैं भी तेज बोल सकता हूं, मेरे फेफड़ों में भी काफी दम है।ÓÓ सदन से बाहर तिवाड़ी का कहना था,’बिना सदन में चर्चा के विधेयक प्रवर समिति को कैसे भेजा गया? गृहमंत्री से हुई तनातनी को लेकर तिवाड़ी बोले, ‘तेज बोलने का अंदाज पुलिसिया ढंग से गालिब कर रहे थे।ÓÓ तिवाड़ी ने कहा,’उन्हें पता होना चाहिए कि गृहमंत्री धमकाने के लिए नहीं जनता की रक्षा करने के लिए होता है। तिवाड़ी ने सदन से दो बार वाकआउट किया। इसके बाद भी उन्हें नहीं सुना गया तो उन्होंने कहा,’सदन में धरने पर बैठ जाऊंगा।ÓÓ विधेयक पर विधायको ंका चौंकाने वाला सच भी उजागर हुआ। 74 प्रतिशत विधायकों को तो यह भी पता नहीं था कि आखिर विधेयक में था क्या? कई विधायक तो यह कह कर रह गए कि पार्टी का फैसला सर्वोपरि है।ÓÓ इससे एक दिन पहले तिवाड़ी पूर्व उपराष्ट्रपति भैरोसिंह शेखावत के जन्म दिवस पर सुंदर सिंह भंडारी चेरिटिबल ट्रस्ट की ओर से आयोजित सम्मान समारोह का यह कह कर बहिष्कार कर चुके थे कि,’काले कानून का विरोध करूंगा, पुरस्कार नहीं लूंगा।

विवादित विधेयक के विरोध प्रदर्शन में भाजपा के वरिष्ठ विधायक घनश्याम तिवाड़ी भी साथ थे। गृहमंत्री गुलाबचंद कटारिया और संसदीय मंत्री राजेन्द्र राठौड़ ने भरोसा दिलाया कि चर्चा के दौरान शंकाओं का समाधान होगा। इसके बावजूद कांग्रेस, नेशनल पीपुल्स पार्टी और भाजपा विधायक घनश्याम तिवाड़ी ने वाक आउट कर दिया। तिवाड़ी ने दो बार वाकआउट किया। कांग्रेस ने विधेयक के विरोध में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सचिन पायलट और नेता प्रतिपक्ष रामेश्वर डूडी की अगुवाई में पैदल मार्च निकाल कर विरोध प्रदर्शन किया।