कांग्रेस का भविष्य अब युवा सबको साथ लेकर चलेंगे

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गहलोत को लेकर दस्तक

राहुल गांधी की इस पटकथा में महाधिवेशन के दौरान दिग्गजों की पहली कतार में पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की सशक्त उपस्थिति, राजस्थान की सियासी पृष्ठभूमि में उन्हें खेवनहार की तरह उकेरती रही। गहलोत दिग्गजों की पहली पांत में पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के निकट खड़े हैं, जबकि मनमोहन सिंह सोनिया गांधी और राहुल गांधी के साथ नजर आ रहे हैं। राजनीतिक रणनीतिकार इस जुगलबंदी को तटस्थ नजरिए से देखने की बजाए राजस्थान में नेतृत्व से जुड़े अंर्तसंबंधों के रूपक की तरह देख रहे हैं। इस सिनेरियो पर नीम चुप्पी साधने की अपेक्षा रणनीतिकार अनकही कड़ी की तरह संभावनाओं पर मुहर लगाते नजर आते हैं कि, ‘प्रदेश की रेतीले राजनीति में कांग्रेस के नेतृत्व की अटकलें चौखट लांघ चुकी है। रणनीतिकार कहते हैं कि,’नेतृत्व को लेकर अंदर ही अंदर बहती धारा पूरी तरह गहलोत को मुख्यमंत्री पेश करने के पक्ष में है जो जन आकांक्षाओं को पूरे आवेग से प्रतिध्वनित कर रही है। महाधिवेशन में आखिरी छोर तक बैठे लोगों ने इस सिनेरियो को संतुलित उम्मीदों के साथ देखा।

सोनिया का ‘अहंकार पर वार’

बेशक प्रधानमंत्री मोदी और भाजपा सरकार की सर्वाधिक कटु आलोचना उनके अहंकार को लेकर थी। सोनिया गांधी ने इस बात पर ज़ोर देते हुए कहा,’हम अहंकारी सरकार के भ्रष्टाचार का सबूतों के साथ खुलासा कर रहे हैं। कांग्रेस के 84वें महाधिवेशन में संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने मिशन 2019 का आगाज करते हुए कहा, ‘अहंकारी मोदी सरकार ने कांग्रेस को मिटाने के लिए कोई कोर-कसर नहीं छोड़ी लेकिन हमें मिटाया नहीं जा सकता। उन्होंने सीधे प्रधानमंत्री पर निशाना साधते हुए कहा,’लोग समझ गए हैं कि, ‘ना खाऊंगा और ना खाने दूंगाÓ सरीखे वादे सिर्फ ड्रामेबाजी, वोट और कुर्सी हथियाने की चाल थी। साम-दाम,,दंड-भेद का खुला खेल चल रहा है। लेकिन कांग्रेस न झुकी है और न झुकेगी? यह कहते हुए उनके उत्साह को सीमा में नहीं बांधा जा सकता था कि,’हम प्रतिशोध, पक्षपात और अहंकार मुक्त भारत बनाने के लिए संघर्ष करेंगे। उन्होंने कहा, मोदी जी, मीडिया को नजरअंदाज करने का माद्दा रखते हैं, यहां तक कि यूपीए सरकार द्वारा चलाई गई योजनाओं को भी, लेकिन हम 2019 में उन्हें सबक सिखाकर रहेंगे।

सोनिया गांधी ने खासकर इस सवाल पर कि साल 2019 के चुनाव में कांग्रेस के मुद्दे क्या होंगे? उन्होंने बीते दिनों मुंबई में एक निजी कार्यक्रम में दिए गए जवाब ही दोहराए कि ‘भाजपा के वादे बेशक जनता को हसीन सपने दिखाते हैं, लेकिन ज़मीनी हकीकत तो पूरी तरह जुदा है। लोग आज भी अच्छे दिनों की बाट जोह रहे हैं। लेकिन भाजपा के अच्छे दिनों का हश्र तो वाजपेयी के कार्यकाल के ‘शाइनिंग इंडियाÓ सरीखा ही होगा।

गरीबी हटाने का संकल्प फिर

अधिवेशन में वैचारिक मंथन के लिए गरीबी उन्मूलन, फसल बीमा और बेरोजगारी सरीखे मुद्दे थे। गरीबी उन्मूलन का संकल्प दोहराते हुए कहा गया कि, ‘इसके लिए गरीबी उन्मूलन कोष बनाया जाएगा और सबसे अमीर भारतीयों पर पांच प्रतिशत उपकर लगाया जाएगा। इस राशि से दलितों और अल्पसंख्यकों के बच्चों को छात्रवृति दी जा सकेगी। मोदी सरकार के ‘स्किल इंडियाÓ पर निशाना साधते हुए कहा गया कि,’इसके तहत सिर्फ दस फीसदी प्रशिक्षित युवाओं को ही रोजगार मिल सका है। पार्टी ने एक मजबूत तंत्र बचाने की बात करते हुए कहा कि,’रियल एस्टेट को पुनर्जीवित करने के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे। गरीबी उन्मूलन पर पारित प्रस्ताव में कहा गया कि,’सत्ता में आने पर पार्टी किसानों की कर्ज माफी योजना फिर से लाएगी। किसानों को जमीन की नीलामी से बचाने के लिए वसूली के वैकल्पिक तरीके तलाश किए जाएंगे। मछुआरों के लिए अलग से मंत्रालय का गठन किया जाएगा। महाधिवेशन में पारित राजनीतिक प्रस्ताव में कहा गया कि,’कांग्रेस 2019 के चुनाव में समान विचारधारा वाले राजनीतिक दलों से हाथ मिला सकती है। एक अन्य प्रस्ताव में भाजपा पर आरोप लगाया गया कि,’भाजपा सरकार ने हर साल दो करोड़ युवाओं को नौकरी देने का वादा तोड़ कर उनके साथ विश्वासघात किया है। लोकसभा और विधानसभा चुनावों को साथ कराने को कपट की संज्ञा देते हुए अव्यावहारिक बताया गया। राजनीतिक प्रस्ताव में कहा गया कि, ‘चुनाव प्रक्रिया की विश्वसनीयता बहाल करने के लिए चुनाव आयोग को पुरानी परम्परा लागू रखने का आग्रह किया जाएगा। आरएसएस को निशाने पर लेते हुए कांग्रेस ने अपने संकल्प में कहा कि,’आरएसएस और भाजपा सत्ता हासिल करने के लिए लोगों की भावनाओं को भड़काने के साथ धर्म की गलत व्याख्या कर रहे हैं। धर्म ओैर राजनीति का यह मिश्रण समावेशी राजनीति के लिए जबरदस्त खतरा पैदा कर रहा है।

महाधिवेशन में ‘सच की शक्तिÓ पैनल चर्चा में मीडिया पर व्यापारिक घरानों पर नियंत्रण तोडऩे की मांग भी उठी। कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल ने कहा,’जिनके आर्थिक व्यापारिक हित हैं, वे इन दिनों मीडिया हाउस चला रहे हैं। उन्हें सत्ताधारियों से भय सता रहा है कि ‘कहीं उनका नुकसान ना हो जाए?Ó नतीजतन प्रतिपक्ष चाहे भी तो उसका रहस्योद्घाटन नहीं हो सकेगा? ऐसे में हकीकत जनता के सामने आएगी भी तो कैसे? उन्होंने संकल्प करने का आह्वान किया कि,’कांग्रेस सत्ता में आएगी तो मीडिया ओैर व्यापार के गठबंधन को तोड़ देगी। चर्चा में शामिल पत्रकार मृणाल पांडे का सुझाव था कि,’राजनेता भारतीय भाषाओं की पत्रकारिता को महत्व देने का प्रयास करें।Ó