कयास की धुंध में जीत हार के दावे

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साल 2003 में हुए चुनाव में मतदान का पिछला रेकार्ड टूटा और 74.51 फीसदी मतदान उस साल हुआ। प्रदेश की जनता ने कांग्रेस को एक बार फिर सत्ता की चाबी सौंपी। 2007 में मतदान करीब तीन फीसदी कम होकर 71.61 फीसदी रहा गया था और बीजेपी की सरकार प्रदेश में बनी थी। 2012 में एक बार फिर मतदान प्रतिशतता में इजाफा हुआ और कांग्रेस सत्तासीन हुई। इस बार भी बंपर वोटिंग प्रदेश में हुई है और देखना यह बाकि है कि इस बार जनता ने सत्ता किसे सौंपी है। इसके लिए 18 दिसंबर तक का इंजतार करना होगा।

भाजपा का सपना मुंगेरी लाल जैसा : वीरभद्र

मतदान के अगले दिन मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह कांग्रेस की जीत के प्रति आश्वस्त दिखे। उन्होंने दावा किया की वे बड़े दावे नहीं करते लेकिन कांग्रेस सरकार बनाने लायक बहुमत ले लेगी। अपने निजी होली लॉज में तहलका से बातचीत में उन्होंने कि भाजपा 50 और 60 प्लस की बात कह रही है, ”लेकिन वह मुंगेरी लाल के हसीन सपने से ज्यादा और कुछ नहींÓÓ। उनका कहना था कि राज्य में कांग्रेस की सरकार बनेगी। कांग्रेस सत्ता में आएगी और अपने चुनाव घोषणा पत्र में की गई सभी घोषणाओं को पूरा करेगी। वीरभद्र सिंह ने कहा कि मतदान के बाद उन्हें थोड़ा आराम मिला है, लेकिन वे उनसे मिलने आ रहे लोगों से मुलाकात कर रहे हैं और उन्हें पूरा समय दे रहे हैं। वीरभद्र सिंह ने कहा कि राज्य के लोग उनके शुभचिंतक हैं और उन्हें मालूम था कि यह उनका आखिरी चुनाव है। इसलिए वे भारी संख्या में मतदान करने के लिए आगे आए हैं और भारी मतदान किया है। उन्होंने फिर दोहराया कि राज्य में कांग्रेस सरकार बनाएगी और वे राज्य की जनता को स्थाई सरकार देंगे। सिंह चुनाव में हुए मतदान से पूरी तरह आश्वस्त दिखते हैं। वे आज कल अपने आवास पर आने वालों से मुलाकात कर रहे हैं साथ ही राज्यभर से हर हलके की फीडबैक ले रहे हैं। कई स्थानीय नेता भी उनके पास आकर अपना आकलन उन्हें देते रहे। कई लोगों ने फोन पर भी सीएम से बात की। जिलों से मिले फीडबैक के बाद सीएम मतदान को लेकर संतुष्ट हैं और वे सरकार के रिपीट होने को लेकर आश्वस्त हैं। उन्होंने अपने फेसबुक पेज पर कहा है कि चुनाव में मतदाताओं ने भारी संख्या में हिस्सा लिया, इसके लिए वे उनके आभारी हैं।

अगले महीने भाजपा की सरकार होगी : धूमल

भाजपा के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार प्रेम कुमार धूमल ने 74 फीसद से ज्यादा मतदान को भाजपा का पक्ष में बताया है। चुनाव के बाद तहलका से बातचीत में धूमल ने कहा कि 18 दिसंबर के बाद केंद्र और प्रदेश में भाजपा की सरकारें होंगी। मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के भाजपा के 60 प्लस मिशन पर आए बयान पर पूछे जाने पर धूमल ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि हर किसी को अपना सपना सच्चा लगता है और दूसरों का सपना मुंगेरी लाल का। उन्होंने कहा कि वीरभद्र सिंह को आइना 18 दिसंबर को नज़र आ जाएगा। वीरभद्र सिंह ने बीजेपी के मिशन 60 प्लस को”मुंगेरी लाल का सपनाÓÓ बताया था। धूमल चुनावों के लिए दिन-रात एक करने के बाद अब समीरपुर स्थित अपने निवास पर दिनभर कार्यकर्ताओं से मुलाकात कर और उनसे चुनावों से संबंधित फीडबैक ले रहे हैं। धूमल ने प्रदेश की जनता का भाजपा के पक्ष में किए गए मतदान के लिए आभार जताया। भाजपा नेता ने कहा कि नदियों में अपना काला धन बहाने वालों या जिन के खिलाफ जांच चल रही है, उन लोगों को ही नोटबंदी से समस्या हुई है। धूमल ने कहा है कि मोदी सरकार के किये गए नोटबंदी के ऐतिहासिक फैसले को एक साल पूरा हो चूका है और इससे आम नागरिक को कोई समस्या नहीं हुई । उन्होंने कहा कि नोटबंदी को लेकर कांग्रेस कह रही है कि इसमें गड़बड़ हुई है, वास्तव में कांग्रेस को काला धन ठिकाने लगाने का मौका नहीं मिला, अब वह इस पर राजनीति कर रही है। धूमल ने कहा कि नोटबंदी के फैसले का कोई भी विपरीत असर हिमाचल प्रदेश में नहीं हुआ। न कोई एटीएम के आगे लाइनें लगी, न कोई अराजकता का माहौल फैला। ”सभी लोगों ने इस कड़े कदम का समर्थन किया और शांति से अपने पुराने नोट बदलवाए। नुकसान हुआ तो केवल कांग्रेस वालों का जिनका काला धन इसके नष्ट हो गया। आज नोटबंदी के एक साल बाद भी कांग्रेस अपनी कुंठा से उभर नहीं पाई है जबकि जनता का इनको बिलकुल भी समर्थन नहीं है।ÓÓ

 चुनाव साथ क्यों नहीं ?

भारत निर्वाचन आयोग को और स्वतंत्रता देने और इसकी स्वायत्ता बनाए रखने को लेकर सवाल उठे हैं। आयोग के मुख्य निर्वाचन आयुक्त और अन्य आयुक्तों की तैनाती एक कमेटी के माध्यम से हो और आयोग में रहकर उन पर सवाल उठने के बाद उन्हें सुप्रीम कोर्ट के जज की तर्ज पर हटाया जाए। इस पर सोशल वेलफेयर काउंसिल ऑफ इंडिया के अध्यक्ष राजेश्वर सिंह नेगी ने सवाल उठाए हैं। नेगी ने कहा कि उन्होंने पीएम नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा है और जल्द ही वे सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका भी दायर करने वाले हैं। उन्होंने कहा कि आज जिस तरह से निर्वाचन आयोग में गतिविधियां चल रही हैं, उससे इसकी निष्पक्षता पर सवाल उठ रहे हैं। उनका कहना था कि एक तरफ तो लोकसभा और विधानसभा के चुनाव एक साथ करने की बात की जा रही है, वहीं उत्तर प्रदेश में विधानसभा के चुनाव सात चरणों में करवाए जाते हैं, यही नहीं, हिमाचल और गुजरात की विधानसभा की टर्म एक साथ समाप्त हो रही थी, लेकिन यहां चुनाव पहले करवाए जाते हैं और गुजरात में बाद में। नेगी ने कहा कि इससे निर्वाचन आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठता है। इसके लिए ज़रूरी है कि आयोग में और सुधार कर लाए जाएं और इसमें की जाने वाली तैनाती में और पारदर्शिता लाई जाए। इसके लिए जरूरी है कि आयोग में नियुक्ति एक कमेटी के माध्यम से हो और इसमें सभी को विश्वास में लिया जाए जैसे अन्य आटोनॉमस संस्थाओं के मुखिया की तैनाती के लिए किए जाते हैं। उन्होंने कहा कि निर्वाचन आयोग में कोई गलत करता है तो सुप्रीम कोर्ट के जज की तरह उसे हटाने का प्रावधान होना चाहिए। उनका कहना था कि इस मामलों को लेकर पीएम मोदी को पत्र लिखा है और जल्द ही वे सुप्रीम कोर्ट में पीआईएल भी दाखिल करने वाले हैं। उन्होंने नोटा को प्रभावी बनाने और आय के स्रोत को पारदर्शी बनाने की भी मांग की है।

पहला वोटर

किन्नौर जिले के श्याम शरण नेगी आम वोटर नहीं हैं। हिमाचल ही  नहीं  देश के लोग भी उन्हें जानते। वे हिमाचल के पहले वोटर हैं। वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में गूगल ने उनके ऊपर वीडियो बनाया। साल 1951 में श्याम शरण ने इतिहास बनाया जब उन्होंने हिमाचल के जिला किन्नौर के कल्पा मतदान केन्द्र पर मतदान किया तो वे स्वतंत्र भारत के पहले मतदाता बन गए। सरकारी स्कूल से शिक्षक के रूप में सेवा निवृत नेगी 100 साल के हैं। ब्रिटिश शासन के अंत के बाद वर्ष 1952 में चुनाव करवाने की घोषणा हुई । हिमाचल के उपरी इलाकों में बर्फबारी के कारण पांच महीने पहले ही चुनाव करवाने पड़े। दरअसल प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू चाहते थे कि देश के जनजातीय इलाके भी मतदान में हिस्सेदारी करें। इस कारण हिमाचल के उपरी इलाकों में पहले चुनाव करवाए गए। नेगी उसी इलाके के थे लिहाजा जब वे वोट देने कतार में सबसे आगे खड़े थे तो उन्हें भी मालूम नहीं था कि वे इतिहास बनाने जा रहे हैं। उन्होंने 1951 के आम चुनाव में मतदान किया। नेगी के परिवार में उनकी पत्नी, चार बेटे और पांच बेटियां हैं। खराब सेहत के बावजूद नेगी ने बूथ नंबर 51 पर वोट डाला। निर्वाचन विभाग ने देश के पहले वोटर के सम्मान के लिए रेड कारपेट बिछाया था। जनजातीय जिला किन्नौर के चिन्नी गांव में रहने वाले श्याम शरण नेगी सौ साल के हो चुके हैं। उन्होंने मजबूत इच्छाशक्ति का परिचय देते हुए वोट डालने का निश्चय किया था। पोलिंग बूथ पर पहुंचे श्याम शरण नेगी को फूलों का गुलदस्ता देकर एडीएम कल्पा अवनिंद्र कुमार ने उनका स्वागत किया। निर्वाचन अधिकारी और किन्नौर के डीसी एनके ल_ ने नेगी के पोलिंग बूथ तक पहुंचने का सारे इंतजाम किया था। इसके लिए एक खास टीम का गठन किया गया था। वोट डालने पहुंचे श्याम शरण नेगी ने एक बार फिर से वोट डालने का अवसर मिलने पर खुशी जताई। नेगी ने कहा कि लोकतंत्र की मजबूती के लिए वोट डालना जरूरी है। सभी को इस अधिकार का प्रयोग करना चाहिए। गौरतलब है कि नेगी चुनाव आयोग के ब्रांड एंबेस्डर भी हैं। वे अपने जीवन में 29 बार वोट डाल चुके हैं।

 

नेताओं के बिगड़े बोल

विशेष संवाददाता

भ्रष्टाचार के मुद्दे पर प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के फरवरी 2017 के भाषण को याद करें। उन्होंने कहा था – मनमोहन सिंह (पूर्व प्रधानमंत्री) जानते हैं कि रेनकोट पहनकर स्नान कैसे करना है। अब नौ महीने बाद मोदी ने हिमाचल प्रदेश की एक चुनाव रैली में कहा- कांग्रेस शासन में ‘पाँच राक्षसÓ पैदा हो गए हैं। ये पांच राक्षस भविष्य की पीढ़ी को लूट रहे हैं। कांगड़ा जिले के रेहन में एक और रैली में उन्होंने कहा- ‘आपके बेटे कश्मीर में देश की हिफाजत करते हैं और उन्हें वहां पत्थर मारे जाते हैं। और हमारे कांग्रेस के नेता इन पत्थरबाजों का समर्थन करते हैं।

और राहुल गांधी ने रेहन रैली में कहा- यह गीता में लिखा है, ‘कर्म करो, फल की चिंता मत करोÓ, लेकिन मोदी का सिद्धांत है – फल खा जाओ और कर्म की चिंता मत करो। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंडी रैली में कांग्रेस पर टिप्पणी में कहा – यह कुछ राजनेताओं की कहानी है जो संकीर्ण स्वार्थी सोच के लिए ‘मानव से दानवÓ बन रहे हैं।

पहाड़ी राज्य हिमाचल में चुनाव प्रचार के यह कुछ निम्न स्तर के भाषणों के उदाहरण हैं- उस प्रदेश में जिसे देव भूमि कहा जाता है। इस बार हिमाचल विधानसभा चुनाव में विभिन्न नेताओं के भाषणों में निम्न स्तर देखा गया। आम आदमी को भी यह आश्चर्यचकित करता है। कांगड़ा में लांबा गांव के एक 72 वर्षीय ग्रामीण कम्मा राम ने कहा यह चिंता की बात है कि खुद को नेता कहने वाले लोग ऐसी भाषा का इस्तेमाल करते हैं। उन्होंने कहा, खराब बात तो यह है कि विकास की बात भी यह लोग विरोधियों पर छींटाकशी करके करते हैं जिसे स्वस्थ नहीं माना जा सकता।

इस विषय पर जब लोगों को टिप्पणी करने के लिए कहा जाता है, तो वे कहते हैं कि आम तौर पर नेता कड़वे शब्दों का उपयोग करने लगे हैं। हमीरपुर जिले के सुजानपुर में स्थानीय नगर परिषद की एक स्वतंत्र सदस्य रहीं सोमा ने कहा कि ज्यादातर लोग नेताओंपर पर विश्वास नहीं करते हैं जब वे एक-दूसरे पर आरोप लगाते हैं, विशेष रूप से चुनाव में। उनके अधिकांश आरोप सही नहीं होते और लोग इसके बारे में जानते हैं। ”लेकिन दिलचस्प यह है कि जब इन्हें बार-बार कहा जाता है तो वही लोग इस पर चर्चा करना शुरू करते हैं क्योंकि वे स्वयं भी पार्टी की राजनीति में शामिल हो जाते हैं।ÓÓ

जब मोदी ने रेहन की रैली में कांग्रेस को ‘हंसने वालों का क्लबÓ बताया, और बाद में मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह पर व्यक्तिगत हमले में उन्हें जमानत पर चल रहे मुख्यमंत्री के रूप में वर्णित किया, तो सिंह ने ट्वीटर पर भाजपा के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार प्रेम कुमार धूमल पर हमला किया। सिंह ने कहा – ‘धूमलजी, भाजपा के भ्रष्टाचार के खिलाफ होने वाली लड़ाई पर आपकी टिप्पणी ने मुझे हंसा दिया। पिछली बार मैंने देखा था, आपके बेटे जमानत पर बाहर थे। अमित शाह और उनके बेटे की आमदनी में 16,000 गुना वृद्धि का चमत्कार भाजपा शासन में ही होता है।

कई लोग सोचते हैं कि मोदी की भाषा गुजरात विधानसभा चुनावों में कांग्रेस के उस पर बाद रहे दबाव का नतीजा है। जबकि कुछ अन्य लोगों का मानना है कि यह मोदी की शैली है। यह एक रोचक बात है कि इस पहाड़ी राज्य के दूर दराज ग्रामों में भी गुजरात चुनावों के बारे में चर्चा है। अपने ही राज्य में चुनाव होने के बावजूद, हिमाचल के लोग जानना चाहते थे कि गुजरात में क्या होगा। कुछ लोगों का मानना है कि कांग्रेस मजबूत हो जाएगी जबकि अन्य कहते हैं कि भाजपा जीतेगी। हालांकि इसका मार्जिन नीचे जा सकता है।

इस पहाड़ी राज्य में विधानसभा चुनावों में सोशल मीडिया ने भी इस बार बड़ी भूमिका निभाई। हिमाचल को केरल के बाद देश में उच्चतर शिक्षा दर वाला राज्य माना जाता है। दूर-दूर तक गांवों में मोबाइल फोन पहुंच गए हैं और लोगों को फेसबुक, ट्विटर और व्हाट्सएप जैसी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर चीजों को साझा करने में आनंद मिलता है। किन्नौर के आदिवासी जिले के रेकांग पियो में 34 वर्षीय रतन नेगी ने इस संवाददाता को बताया कि राष्ट्रीय नेताओं की रैलियों को मैदानी क्षेत्रों में ही आयोजित किया जाता है लिहाजा वे इंटरनेट पर मोदी और राहुल की रैलियों के भाषण देखते हैं। ”राजनीतिक दलों ने उन्हें वॉट्स पर भी साझा किया,ÓÓ उन्होंने कहा। नेताओं द्वारा भाषणों में सस्ते शब्दों के प्रयोग के बारे में पूछा जाने पर उन्होंने कहा कि कोई भी समझदार व्यक्ति इस बात को अस्वीकार करेगा। उन्होंने कहा नेताओं को गरिमा बनाए रखनी चाहिए।

सरकारी स्कूल में शिक्षक चंपा नेगी ने हालांकि, राष्ट्रीय नेताओं द्वारा चुनाव रैलियों के लिए मुश्किल क्षेत्रों को नजरअंदाज करने पर चिंता व्यक्त की। ”यहां तक कि मोदी साहब अपने भाषणों में कहते हैं कि वह दूरतम गांव में रहने वाले व्यक्ति के दर्द को समझना चाहते है। लेकिन फिर क्यों वे चुनाव में हमारे पास नहीं आते, चंपा का सवाल था।

हालांकि, नेताओं का मानना है कि ज्यादातर समझदार नेताओं की भाषा संतुलित और सम्मानजनक होती है। हाँ कई बार लोगों को रिझाने के लिए चुटकलों की मदद नेता ले लेते हैं। ”जनता में बोलने के दौरान कांग्रेस नेता अधिक समझदार होते हैं लेकिन आप भाजपा नेताओं को सुनिए। यहां तक कि प्रधानमंत्री साहब उन शब्दों का इस्तेमाल करते हैं जिनका उपयोग उनके स्तर के किसी व्यक्ति द्वारा नहीं किया जाना चाहिए। हमीरपुर में यह कहना था कांग्रेस के प्रवक्ता प्रेम कौशल का। उधर भाजपा मीडिया सेल के प्रभारी गणेश दत्त ने कांग्रेस नेताओं द्वारा इस्तेमाल की गई भाषा पर सवाल उठाया। ”कांग्रेस की अध्यक्ष सोनिया जी के कहे मौत के सौदागर जैसे शब्दों को न भूलें। उधर शिमला के पूर्व महापौर और सीपीएम नेता संजय चौहान ने हालांकि आरोप लगाया कि आम जनता की समस्याओं के साथ कांग्रेस और भाजपा दोनों का कोई संबंध नहीं है। उन्होंने कहा, ‘यही कारण है कि वे ऐसे बेहूदा चीज़ों पर अधिक ध्यान देते हैं। उनका किसानों और गरीबों से संबंधित मुद्दों से कुछ सरोकार नहीं होता।