कमायी का अड्डा सोशल मीडिया

दिल्ली के कुछ अभियंता (इंजीनियर) के छात्रों ने बताया कि सोशल मीडिया एक बड़े कारोबार के रूप में उभरकर सामने आया है, जिसकी बाग़डोर भले ही विदेशी हाथों में हो, पर इसके कारोबार में अपनी उपस्थिति दर्ज कराने के लिए भारत भी बहुत पीछे नहीं है। विज्ञापन मिलने में गूगल के बाद फेसबुक का कारोबार दूसरे स्थान पर है। ऐसे में फेसबुक से जुड़े सारे तंत्र में अपनी-अपनी भागीदारी को लेकर कार्पोरेट घराने इस जुगत में हैं कि वे भी इस कारोबार का हिस्सा बनें। डीटीयू से अभियांत्रिकी (इंजीनियरिंग) करने वाले कुमार हर्ष कहते हैं कि एक साथ कई सोशल साइट्स के बन्द होने के साथ ही फेसबुक.कॉम और व्हाट्सऐप.कॉम को बेचने की कोशिशें तेज़ हो रही हैं।

साइबर विशेषज्ञों का मामना है कि कई बार तकनीकी तंत्र इस क़दर मज़बूत होता है कि चाहकर भी आसानी ने कुछ बदला नहीं जा सकता। क्योंकि इसके पीछे डाटाबेस (आँकड़ों और विवरण पर आधारित) है। सारा काम इन्हीं का है और इन्हें एकजुट करके हासिल करना बड़ी बात होती है। ऐसे में फेसबुक और व्हाट्सऐप को बेचने की तामाम सम्भावनाएँ अटकलबाज़ी हो सकती हैं; क्योंकि मामला 2,00 करोड़ से अधिक उपभोक्ताओं से जुड़ा हुआ है।

शेयर बाज़ार में काम करने वाले करने वाले राजकुमार कहते हैं कि फेसबुक ने ख़राबी को लेकर असली वजह नहीं बतायी है। लेकिन जानकारों का अनुमान है कि यह सब डोमेन नेम सिस्टम की समस्या हो सकती है। शेयर बाज़ार का अपना मिजाज़ है और उसमें ज़रा-सी गड़बड़ी से उथल-पुथल मच जाती है। सोशल मीडिया का तकनीकी तंत्र ख़राब होने से अमेरिका में फेसबुक के शेयर काफ़ी नीचे तक गिर गये थे, जिसका आंशिक असर भारत के शेयर बाज़ार भी पड़ा। राजकुमार कहते हैं कि जब भी कोई बड़ा कारोबार पल भर के लिए ही बाधित होता है, तो उससे लाखों-करोड़ों का नुक़सान होता है। फिर यह तो सोशल मीडिया वह नेटवर्क तंत्र है, जो पूरी दुनिया और उसके एक बड़े कारोबार क्षेत्र को आपस में जोड़कर रखे हुए है।