कमांडर हारा, सेना जीती

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वैसे नड्डा के अलावा जय राम ठाकुर और अजय जम्वाल के नाम भी मुख्यमंत्री पद की दौड़ में शामिल बताये जा रहे हैं। चुनाव के नतीजे आने के बाद यह चर्चा भी रही कि धूमल के प्रदेश और भाजपा की राजनीति में महत्व को देखते हुए आलाकमान उन्हें मुख्यमंत्री मनोनीत कर सकती है और फिर हमीरपुर से जीते नरेंद्र ठाकुर से सीट खाली करवाकर धूमल को उपचुनाव में उतारा जा सकता है। वैसे होगा क्या, इसकी तस्वीर कुछ दिन में साफ होगी।

कांग्रेस में राहुल गाँधी के अध्यक्ष बनने के बाद पार्टी में बदलाव होना तय है। ऐसे में हिमाचल में वीरभद्र सिंह का क्या भविष्य होता है इसका पता भी आने वाले दिनों में ही चलेगा। पार्टी में आशा कुमारी, मुकेश अग्निहोत्री जैसे नेता अब अग्रिम पंक्ति में दिखेंगे। वीरभद्र सिंह, जो इस चुनाव में मोर्चे पर अपने बूते लड़े, ने पार्टी की हार अपने ऊपर लेते हुए कि पार्टी के पास संसाधनों की कमी पार्टी की जीत के आड़े आई। उधर धूमल ने जनता का पार्टी की जीत के लिए धन्यवाद किया। अपनी हार पर उन्होंने कहा कि वे इससे दुखी हैं पर भाजपा के फिर सत्ता में आने की उन्हें खुशी है। ‘तहलकाÓ से बातचीत में धूमल ने कहा कि जनता ने मोदी सरकार की नीतियों पर मुहर लगाई है। उन्होंने कहा ज़रूर कोइ कमी रही जो चुनाव में उन्हें मतदाताओं का समर्थन नहीं मिल पाया।

कांग्रेस इस चुनाव में 22 सीटें ही जीत पाई। प्रदेश में जनता का हर चुनाव में सरकार बदल देने का चलन इस बार भी जारी रहा। दरअसल प्रदेश में सरकारी कर्मचारी चुनाव में बड़ा रोल निभाते हैं। इस का कारण यह है कि यहाँ कमोवेश हर घर से एक व्यक्ति सरकारी नौकरी में है। निजी क्षेत्र सीमित है लिहाजा लोगों को रोजगार के लिए सरकारी क्षेत्र पर निर्भर रहना होता है। इस समय सरकारी रोजगार विभाग में करीब 6 लाख नाम बेरोजगारों के दर्ज हैं जो नौकरी के लिए कतार में हैं। ऐसी स्थिति में सरकारी कर्मचारी हर बार सरकार बदल देने में अपनी भलाई मानते हैं। उनकी सोच है नई सरकार से उन्हें ज्यादा बेहतर लाभ मिलने की गुंजाइश रहती है।

माकपा दो दशक के बाद विधानसभा में अपनी उपस्थिति दर्ज करवाने में सफल रही है। राकेश सिंघा को प्रदेश के सबसे जुझारू नेताओं में गिना जाता है। गुडिय़ा दुष्कर्म और हत्या मामले में उसके परिवार के लिए इन्साफ के जो लड़ाई माकपा ने लड़ी उसीका नतीजा है कि उसे ठियोग में जीत मिली है। इससे पार्टी को आने वाले वक्त में शिमला इलाके में अपना विस्तार करने का अवसर मिला है। देखना है वह इसका कितना लाभ उठा पाती है।

इन चुनाव नतीजों के बाद कांग्रेस में उठापटक देखने को मिल सकती है। वीरभद्र सिंह की उम्र को देखते हुए युवा नेता आगे आने की जंग में जुटेंगे। आशा कुमारी का नाम इसमें सबसे आगे है। पार्टी में भावी मुख्यमंत्री के रूप में जाने जाने वाले सुधीर शर्मा धर्मशाला से चुनाव हार गए लेकिन हरोली से जीते मुकेश अग्निहोत्री अब अपने लिए कोशिश शुरू कर सकते हैं। कौल सिंह के चुनाव हारने से उनका रास्ता भी बंद हो गया लगता है।