कमल में कीचड़

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भाजपा की एक और बड़ी दुविधा प्रदेश संगठन के दूसरे सबसे ताकतवर नेता यानी प्रदेश संगठन महामंत्री अरविंद मेनन को लेकर है. मेनन के खिलाफ एक महिला के यौन उत्पीड़न का मामला सवा दो साल से मप्र मानव अधिकार आयोग और जबलपुर पुलिस अधीक्षक के बीच जवाब तलब में उलझा है. दरअसल जबलपुर की सुशीला मिश्रा नाम की महिला ने सवा दो साल पहले राज्य मानव अधिकार आयोग को शपथ पत्र भेजकर शिकायत की थी जबलपुर पुलिस अरविंद मेनन के खिलाफ मामला दर्ज नहीं कर रही है. शपथपत्र में लिखा है कि मेनन ने उसे शादी का झांसा देकर उसका यौन शोषण किया था. महिला के मुताबिक मेनन उसे ‘मिसेज अरविंद मेनन’ कहकर बुलाता था. लेकिन बाद में उसे पता चला कि वह ऐसी पांच महिलाओं को ‘मिसेज अरविंद मेनन’ कहकर बुलाता था. कुछ समय बाद मेनन ने जब उससे दूरी बना ली तो वह अपने साथ हुए धोखे और दुराचार की शिकायत लेकर ओमती (जबलपुर) थाने पहुंची. लेकिन यहां उसे पुलिस अधिकारियों ने मार डालने की धमकी देकर भगा दिया. लंबे समय से यह महिला गायब है. इसी तरह,  इंदौर में पार्टी के संभागीय संगठन मंत्री रहते हुए भी मेनन को इसी तरह की बदनामी झेलनी पड़ी थी.

सूबे के भाजपा नेताओं पर लगे ऐसे दाग नए नहीं हैं. 2006 में भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव रहे संजय जोशी की अश्लील सीडी आने के बाद दिल्ली तक भाजपा की राजनीति गर्मा गई थी. उनके विरोधियों ने यह सीडी भोपाल में ही जारी की थी. तब उनके पास मप्र का प्रभार भी था. लेकिन खुलासे के बाद उन्हें मप्र के प्रभार के साथ ही राष्ट्रीय महासचिव का पद भी छोड़ना पड़ा था. 2004 में तत्कालीन मुख्यमंत्री बाबूलाल गौर का नाम भी महिलाओं से जोड़ा गया था. तब एक महिला इस मामले को लेकर भाजपा कार्यालय के सामने धरने पर बैठ गई थी. उसने दिल्ली जाकर भी यह मामला उठाया. इसके कुछ समय बाद ही गौर को मुख्यमंत्री की कुर्सी छोड़नी पड़ी.

बीते साल बहुचर्चित शेहला मसूद हत्याकांड के समय भोपाल (मध्य) के भाजपा विधायक ध्रुव नारायण सिंह का नाम शेहला और इस हत्याकांड की मुख्य आरोपिता जाहिदा से सेक्स संबंधों को लेकर उछला था. कहा जाता है कि सीबीआई की कई दौर की पूछताछ में ध्रुव के कई महिलाओं के साथ संबंधों का खुलासा हुआ है. हाल ही में विजय शाह को आदिवासी छात्राओं के बीच द्विअर्थी संवाद बोलने और मुख्यमंत्री की पत्नी पर अश्लील टिप्पणी करने के बाद आदिम जाति कल्याण महकमे के मंत्री पद से हटना पड़ा था. शाह पर रंगरेलियां मनाने के आरोप लगने की शुरुआत  उनके गृह जिले खंडवा के मालेगांव मेले में कराए गए नृत्य के साथ हुई थी. शाह के मामले के साथ ही पशुपालन मंत्री अजय विश्नोई के खिलाफ भी एक मामला तूल पकड़ गया था. विश्नोई पर उनके मकहमे के ही पशुचिकित्सक डॉ एसएमएच जैदी ने आरोप लगाया था कि उनके तबादले के लिए मंत्री ने अपने करीबी शौकत अली के मार्फत उनकी पत्नी को मंत्री के पास भेजने को कहा था. जैदी के मुताबिक जब उन्होंने इसकी शिकायत विश्नोई से की तो जवाब मिला- कुछ पाने के लिए कुछ खोना पड़ता है. यही नहीं बीते दो सालों में भाजपा के मंदसौर जिलाध्यक्ष कारूलाल सोनी और संघ के पदाधिकारी महेंद्र सिंह जैसे कई छोटे-बड़े नेताओं की अश्लील सीडियां आना पार्टी के लिए परेशानी का सबब बन चुकी हैं.

राघवजी प्रकरण ने यह साफ कर दिया है कि भाजपा में अंतर्कलह इस हद तक है कि भाजपाई एक-दूसरे को बेनकाब करने के लिए कुछ भी कर सकते हैं. लेकिन चुनावी साल में भाजपा मर्ज की दवा ढ़ूंढ़ने के बजाय राघवजी मामले से अपना पल्ला झाड़ लेना चाहती है. वहीं कांग्रेस है कि इसे इतनी जल्दी छोड़ने को तैयार नहीं. पार्टी प्रदेश अध्यक्ष कांतिलाल भूरिया ने तय किया है कि पार्टी राघवजी के अलावा मेनन, गौर, ध्रुव, विश्नोई और शाह से जुड़े मामले चुनाव में उठाएगी. भूरिया की सुनें तो, ‘यौन उत्पीड़न के मामले में मप्र बहुत आगे है और ऐसे में यदि मुख्यमंत्री अपने मंत्रियों पर ही लगाम नहीं कसेंगे तो किस पर कसेंगे.’

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