ओमिक्रोन का असर: बाज़ारों में सन्नाटा

वहीं किसान आंदोलन खत्म हो रहा है।  क्योंकि किसानों पर देश का व्यापार काफी हद तक निर्भर है।लेकिन जिस तरह से कोरोना का नया स्वरूप जो बढ़ रहा है। इससे व्यापार के साथ अर्थ व्यवस्था पर काफी चोट पहुंचने लगी।जिससे बेरोजगारी और महगांई बढ़ना निश्चित है।

दिल्ली के व्यापारियों का कहना है कि अगर ऐसे ही चलता रहा तो महगांई की मार चलती रहेगी। क्योंकि पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ने से वैसे ही किराया-भाड़ा बढ़ा है।दिल्ली के कपड़ा व्यापारी परम लाल अग्रवाल ने बताया कि अभी सिर्फ ओमिक्रोन की दस्तक ही है।

लेकिन बाजारों में ग्राहक कम आने लगें है। उनका कहना है कि सर्दी के मौसम में और इन दिनों शादियां की लगन है फिर भी बाजार में खरीददार कम दिखने शुरू हो गये है। वजह साफ है कि एक तो लोगों के पास पैसा का अभाव है उस पर, ओमिक्रोन का भय है। सो लोग पैसा कम से कम खर्च करना चाह रहे है। जिसकी वजह से बाजारों से सन्नाटा बढ रहा है।