ऑस्ट्रेलिया

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खास बात

ऑस्ट्रेलियन टीम से ब्राजील में कोई बड़ी उम्मीद लगाना जायज नहीं है. अनुभव हासिल करने के लिहाज से टीम के लिए यह बड़ा मौका है. किसी तरह के भय से रहित और उम्मीदों के बोझ से मुक्त यह टीम अपने ग्रुप में दूसरों का खेल खराब करने का काम कर सकती है ऑस्ट्रेलिया की गिनती इस बार सबसे कमजोर टीम के रूप में हो रही है. यह ऑस्ट्रेलिया की सबसे युवा टीम है और यह विश्व कप उनके लिए एक जरूरी अनुभव प्राप्त करने का जरिया-भर है. ब्राजील का टिकट पाने वाली 32 टीमों में यह टीम सबसे कम उम्र की टीम है. टीम को रास्ता दिखाने की जिम्मेदारी घरेलू कोच आंगे पोस्टकोग्लू और कप्तान टिम काहिल के हाथों में है. पोस्टकोग्लू की मजबूरी यह है कि उन्होंने पिछले अक्टूबर महीने में ही टीम की जिम्मेदारी संभाली है और इस दौरान टीम ने सिर्फ तीन बड़े मैच खेले हैं. टीम में किसी बड़े स्ट्राइकर (आक्रमण की कमान संभालने वाला खिलाड़ी) के अभाव को देखते हुए मिडफील्डर काहिल के कंधों पर अटैक की सारी जिम्मेदारी रहेगी. उनका साथ देने के लिए इवान फ्रैंजिक और जेसन डेविडसन मौजूद रहेंगे. समस्या ये है कि दोनों ही अग्रिम पंक्ति के खिलाड़ी हैं जबकि डिफेंस का इलाका पूरी तरह से खाली है. बड़े स्ट्राइकरों के सामने यह स्थिति आत्महत्या करने जैसी होगी. माइल जेडिनक के कंधों पर अकेले मिडफील्ड की जिम्मेदारी होगी. तमाम बातों और हालात के मद्देनजर जानकारों की राय है कि ऑस्ट्रेलियाई टीम विश्व कप से वापसी का जहाज पकड़ने वाली पहली टीम हो सकती है.

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