उत्तरपूर्व में तिल का ताड़ बनी छोटी सी जातीय झड़प

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एनसीएम सदस्य ने वादा किया कि राज्य और केंद्रीय अधिकारियों ने पहले ही शिलांग के सिख समुदाय की सुरक्षा संबंधी तमाम कदम उठा लिए हैं।

शिलांग में परस्पर विरोधी बयान सामने आए जिनके कारण ‘खासीÓ समुदाय और दलित पंजाबियों में झड़पें हुईं। कुछ खबरों में यह आरोप था कि एक पंजाबी महिला को पार्किग के बहाने परेशान किया गया। यह मामला तब उठा जब एक जगह जो मेघालय स्टेट ट्रांसपोर्ट कारपोरेशन बस की पार्किग के लिए नियत थी वहां बस खड़ी करने के मुद्दे पर पंजाबी महिला और ‘खासीÓ बस चालक के बीच वाद-विवाद छिड़ा। वह महिला पंजाबी कॉलोनी में ही रहती थी। सिख समुदाय के कुछ सदस्यों का कहना है कि जब एक सिख महिला को ‘खासीÓ समुदाय के लोगों ने परेशान करना शुरू किया तो वह महिला और चार दूसरी महिलाओं ने ‘खासीÓ समुदाय के लोगों की पिटाई कर दी। खासियों का कहना था कि विवाद तो पार्किंग पर था लेकिन बेवजह उन्हें पीटा गया। जिसमें बाद में पंजाब लाइन कॉलोनी के पुरु ष भी आ मिले।

परस्पर दावों का यह मामला स्थानीय कैंटोनमेंट बोर्ड पुलिस स्टेशन जा पहुंचा जहां आपस में सुलह-सफाई की कोशिश हुई। ‘खासीÓ समुदाय के बस चालक ने ‘खासीÓ में समझौते में लिखा है कि उस पर सिख महिला और पुरु षों ने जो हमला किया उस पर उसके मन में कोई प्रतिरोध का भाव नहीं है।

लेकिन व्हाट्सएप पर जो ‘फेक न्यूजÓ (गलत सूचना) प्रसारित हुई उसमें कहा गया कि कॉलोनी के कुछ लोगों ने ‘खासीÓ समुदाय के दो बच्चों को पकड़ लिया है। तुरंत ही एक समूह कॉलोनी के पास इकट्ठा हो गया। वहां मौजूद स्थानीय पुलिस और सीआरपीएफ के जवानों के साथ उन्होंने हाथा-पाई शुरू कर दी। दोनों पक्षों के लोग घायल हुए। पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े जिससे हिंसा पर उतारू भीड़ तितर-बितर हो।

शिलांग के कई हिस्सों में कफ्र्यू लगा। इंटरनेट और व्हाट्सएप वगैरह सेवाएं बंद कर दी गई। जिससे अफवाहों पर रोक लगे। सेना को सतर्क किया गया। अशांत इलाके से सेना ने तीन सौ नागरिकों को कैं टोनमेंट में पनाह दी।

मेघालय की सिख आबादी और उनके धार्मिक संस्थानों की सुरक्षा के संबंध में मुख्यमंत्री कोनराड संगमा ने पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह से बातचीत की। उन्हें भरोसा दिया कि सिख समुदाय और उनके धर्मस्थलों की पूरी सुरक्षा की जाएगी। उधर पंजाब सरकार की ओर से जारी बयान में कहा गया है मेघालय के मुख्यमंत्री कोनराड संगमा ने राज्य में हुई संप्रदायिक हिंसा की जानकारी पंजाब के मुख्यमंत्री को दी। एक मामूली विवाद ने हिंसा का रूप ले लिया जिसका संदेश गया कि सिखों के साथ हिंसा हुई है। संगमा ने यह भरोसा दिया कि किसी भी गुरूद्वारे या किसी सिख संस्थान को कोई नुकसान नहीं हुआ है।