अवैध खनन का बड़ा घोटाला

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‘रेडियो एक्टिवÓ और परमाणु खनिजों का अवैध निर्यात खतरनाक है जबकि इसमें गाढ़ा ‘मोनाज़ाइटÓ भी था जिसमें ‘थोरियमÓ होता है जो परमाणु उद्योग में इस्तेमाल किया जाता है। यह देश और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सुरक्षा के लिए गहरी चिंता का विषय है। आंध्र प्रदेश के सतर्कता और प्रवर्तन विभाग और खनन और भूगर्भशास्त्र के अधिकारियों ने ‘ईस्ट-वेस्ट मिनिरल सैंड्स प्राइवेट लिमिटेड (ट्राइमेक्स इंडस्ट्रीस लिमिटेड) के जून, सितंबर और नवंबर 2015 के मामलों की जांच की। ईस्ट वेस्ट मिनिरल सैंड प्राइवेट लिमिटेड (यह लीज़ ट्राइमेक्स इंडस्ट्रीस लिमिटेड से ईस्ट-वेस्ट मिनीरल सेंड प्राइवेट लिमिटेड के नाम बदली गई थी) और आज यह ट्राइमेक्स सैंडस (पी) के नाम पर काम कर रही है। जांच कर्ताओं को पता चला कि ट्राईमेक्स इंडस्ट्रीस ने 304.40 एकड़ विवादित ज़मीन पर खनन किया और 1295.63 करोड़ के अवैध खनिज निकाले। रिपोर्ट में कहा गया कि ट्राईमेक्स इंडस्ट्रीस ने अपने प्लांट के नीचे 9750 मीट्रिक टन ‘मोनाजाइट़Ó जमा कर रखा है। पर ऐसा लगता है कि परमाणु ऊर्जा विभाग ने इसे अपने कब्जे में लेने का कोई प्रयास नहीं किया है।

सभी ट्राइमेक्स इंडस्ट्रीस ने अवैध तरीके से 17,58,112 मीट्रिक टन ‘बीच सैंडÓ परमाणु खनिज को निकाला और उसे विभिन्न स्थानों पर भेजा। इसकी कीमत 1295.63 करोड़ बनती है।

इस बारे में ट्राइमेक्स ग्रुप ने कहा कि यह कहना गलत और झूठ है कि कंपनी ने अवैध खनन कर 17,58,112 मीट्रिक टन सामग्री बाहर निकाली जिसकी कीमत 1295.63 करोड़ बनती है और इसमें ‘मोनाजाइटÓशामिल है। सतर्कता विभाग बिना किसी आधार के इन आंकड़ों तक पहुंचा है। ध्यान देने की बात यह है कि सतर्कता विभाग की रिपोर्ट स्वयं अपनी ही बातों का खंडन करती है, और यह आधारहीन, निरर्थक और काल्पनिक आधार पर तैयार की गई है। जब 2005 में हमने आरटीआई के तहत रिपोर्ट की प्रतिलिपि मांगी तो सतर्कता और प्रवर्तन विभाग के आधिकारियों ने हमें रिपोर्ट की प्रतिलिपि नहीं दी थी।

सतर्कता और प्रवर्तन विभाग की महा निदेशक एआर अनुराधा ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि खनन और भूगर्भशास्त्र के अधिकारियों ने खनन को जारी रखवाया और खनिजों को 387.72 एकड़ विवादित क्षेत्र से बाहर ले जाने के लिए पर्चियां जारी की। जबकि यह निर्धारित मानकों का उल्लंघन था। श्रीकाकुलम जि़ले के गाड़ा मंडल के गांव वातसावालसा में अधिकारी खनन को रोकने में विफल रहे।

ट्राइमेक्स ने इन आरोपों का खंडन किया। उनका कहना है कि बीच सैंड खनिजों के खनन और परमाणु खनिजों के निर्यात के बारे में दी गई रिपोर्ट झूठी और गलत हैं। उनका कहना है कि खनन से संबंधित कंपनी की सारी कार्रवाईयां कानून और नियमों के तहत हैं। उनका कहना है कि कुछ लोग जिनकी अपनी रुचियां इसमें हैं वे हमारे खिलाफ सरकार और दूसरी एजेंसियों के पास शिकायतें करते रहते हैं।

महानिदेशक ने राजस्व विभाग के प्रधान सचिव को 1295.63 करोड़ रुपए वसूलने की सिफारिश की थी क्योंकि कंपनी ने राजस्व विभाग से खनन के लिए कोई मंजूरी नहीं ली थी। साथ ही गाड़ा मंडल के तहसीलदारों के खिलाफ कार्रवाई करने की भी सिफारिश की थी जिन्होंने विवादित स्थल पर खनन नहीं रोका। इसी रिपोर्ट में आंध्र प्रदेश के प्रधानसचिव से कहा गया था कि वहां खनन बंद कर दें क्योंकि वह नियमों के अनुसार नहीं हो रहा था। इस रिपोर्ट की प्रतिलिपियां प्रधानसचिव राजस्व, प्रधानसचिव उद्योग व वाणिज्य और मुख्य सचिव आंध्र प्रदेश सरकार को भी भेजी गई लेकिन अवैध खनन और ‘मोनाजाइटÓ का निर्यात बदस्तूर जारी रहा। हैरानी की बात है कि आज तक परमाणु ऊर्जा विभाग ने भारी मात्रा में ‘मोनाजाइटÓ के निर्यात के बावजूद आज तक इस विषय में कोई कार्रवाई नही की है। इस खनन से न केवल सरकार को राजस्च का भारी नुकसान हो रहा है बल्कि देश की सुरक्षा के लिए भी खतरा बन रहा है।

आंध्र प्रदेश सरकार के सतर्कता व प्रवर्तन विभाग की जांच से खुलासा हुआ है कि ट्राईमेक्स इंडस्ट्रीस ने खनन के लिए निर्धारित योजना के अनुरूप काम नहीं किया और नियमों का उल्लंघन किया है। जो वृक्षारोपण उस क्षेत्र में होना चाहिए था वह भी नहीं किया गया है।

निष्क्रियता

आंध्रप्रदेश के सतर्कता व प्रवर्तन विभाग ने अपनी 11 मार्च 2.016 के रिपोर्ट में ट्राईमेक्स ग्रुप से 1295.63 करोड़ रुपए वापिस लेने की सिफारिश की थी जो उन्होंने 17,58,112 मीट्रिक टन अवैध खनन करके कमाए थे। विभाग ने विभिन्न विभागों के अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई करने की सिफारिश की थी। खनिज ‘कनसेशनÓ के नियम 22ए का उल्लंघन करने के लिए भी इनके खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश की थी। आंध्रप्रदेश सरकार ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि फर्म ने राजस्व विभाग की मंजूरी के बिना श्रीकाकुलम जि़ले के वातसावालसा और गाड़ा गावों मे खनन किया।

अब कंपनी की विदेशों में चल रही कंपनियों की जांच भी ज़रूरी है जहां पर इन खनिजों का निर्यात किया गया। इस कारण इसमें सीबीआई जैसी किसी संस्था से जांच कराने की ज़रूरत है।

ट्राइमेक्स का कहना है कि हाईकोर्ट ने वन विभाग को वतसावालासा गांव के सर्वेक्षण नंबर 216 और 217 में कंपनी की चल रही खनन प्रक्रिया में दखल देने से रोक दिया है। इसके बावजूद 2012 में वन विभाग ने यह कहते हुए कि हाईकोर्ट का आदेश ने उन्हें केवल सर्वेक्षण नंबर 216 और 217 में ही हस्तक्षेप करने से रोका है। इससे परेशान हो कर कंपनी ने हाईकोर्ट में एक और याचिका दाखिल की कि वन विभाग को सभी सर्वेक्षण नंबरों में भी हस्तक्षेप करने से रोका जाए जो कि जीओ के तहत आते हैं। यह क्षेत्र 7.2 वर्ग किलोमीटर बनता है। ये दोनों आदेश आज तक लागू हैं।

इतने सारे सबूत होने के बावजूद इस मामले में सरकारी अफसरों की निष्क्रियता यह संकेत देती है कि ट्राईमेक्स ग्रुप ने कितना दबाव इस्तेमाल किया होगा और इस ग्रुप की सांठगांठ नौकरशाही और राजनीति में शिखर तक होगी। देखना है कि अब राज्य या केंद्र सरकार खुद इसमें कार्रवाई करती है या इसे अदालतों पर छोड़ दिया जाता है।