अल्जीरिया

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खास बात

20 अंतर्राष्ट्रीय मैचों में 10 गोल कर चुके इस्लाम सुलेमानी इन दिनों शानदार फॉर्म में हैं. जरूरत के वक्त गोल करने की उनकी क्षमता का ही कमाल है कि 25 साल का यह स्ट्राइकर अपने क्लब और देश दोनों का चहेता है. पेनाल्टी बॉक्स के दायरे में उनकी तेजी देखते ही बनती है. अल्जीरिया के प्रदर्शन में उनकी भूमिका अहम होगी 2010 के विश्व कप में अल्जीरिया का प्रदर्शन निराशाजनक रहा था. एक भी गोल किए बिना वह पहले चरण में ही बाहर हो गई थी. चार साल बाद आज स्थितियां बदली हुई हैं. अल्जीरिया आज अफ्रीकी महाद्वीप की शीर्ष टीम है और उसके पास अपने ग्रुप की रूस और दक्षिण अफ्रीका जैसी टीमों को झटका दे सकने वाले कई खिलाड़ी हैं. 2011 में टीम का जिम्मा संभालने वाले कोच वाहिद हलीलहोज्डिक ने इस टीम का कायापलट कर दिया है. आज अल्जीरिया की टीम जिस शैली में खेलती है उसमें 2010 के उलट सकारात्मकता और आक्रामकता के दर्शन होते हैं. बोस्निया में जन्मे हलीलहोज्डिक ने मिडफील्ड और फॉरवर्ड पोजीशन के लिए नौजवान और फुर्तीले खिलाड़ियों को प्राथमिकता दी है. टीम की सुरक्षा पंक्ति की अगुवाई माजिद बगहेरा कर रहे हैं जो 62 अंतर्राष्ट्रीय मैचों के तजुर्बे के साथ टीम के सबसे अनुभवी खिलाड़ी हैं. नबील बिनतालिब , हसन येब्दा और लासन के साथ मिलकर वे एक बढ़िया सुरक्षा घेरा बनाते हैं. उधर, सोफियान फेगौली, अल अरबी सूडानी और इस्लाम सुलेमानी के रूप में अल्जीरिया के पास काफी प्रभावशाली आक्रमण है. इन सबके साथ अल्जीरिया 2010 के उलट प्रदर्शन कर सकता है.

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