अमरिंदर ने 3 आप विधायकों को पार्टी में शामिल करवा दिखाई ताकत, कल मिलेंगे समिति से

वैसे खैरा पहले कांग्रेस में ही थे। लेकिन 2015 में वे आप में चले गए थे। जब 2017 में विधानसभा के चुनाव हुए तो वे भोलथ से चुनाव जीत गए। उन्हें इससे पहले आप की तरफ से मुख्यमंत्री पद का दावेदार माना जाने लगा था, लेकिन बाद में एक स्टिंग और अन्य कारणों से वे पार्टी से खफा हो गए। जनवरी 2019 में  वे खुले रूप से आप के खिलाफ हो गए और पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से उन्होंने इस्तीफा दे दिया। इसके बाद खैरा ने अपनी पार्टी ‘पंजाब एकता पार्टी” का गठन कर लिया।

उधर पार्टी का एक वर्ग सोनिया गांधी की समिति के सामने लगातार तर्क दे रहा है कि अमरिंदर सिंह के नेतृत्व में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव में पार्टी नहीं जीत सकती। पंजाब में अफसरशाही के हावी होने और आम लोगों से सरकार के कट जाने के आरोप भी इस धड़े की तरफ से लगाए गए हैं। दलितों के सरकार में कम प्रतिनिधित्व को लेकर भी बागियों ने आवाज उठाई है।

इसके अलावा साल 2015 में शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन के दौरान गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी और पुलिस फायरिंग से जुड़े मामलों में दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने में सरकार की नाकामी को लेकर भी अमरिंदर सरकार पर पार्टी के लोग सवाल उठा रहे हैं। पार्टी के नाराज विधायकों को आशंका है कि ग्रामीण स्तर पर कांग्रेस इन चार सालों में कमजोर हुई है और अमरिंदर के रहते पार्टी को अगले साल चुनाव में इसका नुक्सान उठाना पड़ेगा।

उधर अमरिंदर समर्थक अपने नेता के हक़ में दलीलें दे रहे हैं। उनका कहना है कि अमरिंदर के अलावा पार्टी के पास ऐसा कोई नहीं जो चुनाव में पार्टी को जिता सके। नवजोत सिंह सिद्धू का मसला पार्टी में बहुत अहम है और कांग्रेस आलाकमान उन्हें किसी सूरत में खोना नहीं चाहती। ऐसे में सोनिया की बनाई तीन सदस्यीय कमेटी की सिफारिशें बहुत महत्वपूर्ण होंगी। अभी तक तो ऐसा ही लग रहा है कि सिद्धू को कोई न कोई महत्वपूर्व पद ज़रूर दिया जाएगा।