अब सातवें चरण में जीत की रस्साकशी

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वाराणसी संसदीय क्षेत्र में जबरदस्त मुकाबला है। यहां विजय नहीं बल्कि सांस्कृतिक-राजनीतिक-धार्मिक मूल्यों की लड़ाई है। यहां ऐतिहासिक मशहूर गलियां नष्ट कर दी गईं। पुराने मंदिर जो घरों में थे वे नष्ट कर दिए गए। बाबा विश्वनाथ को मुक्त हवा देने का दावा किया गया। रोजग़ार खत्म हुआ विकास के नाम पर विनाश हुआ।

काशी कुरुक्षेत्र का रण बन गई है। भाजपा अध्यक्ष अमित शाह छठे चरण का मतदान खत्म होते ही वाराणसी पहुंच गए। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल अपनी रणनीति को अंतिम रूप दे रहे हैं। प्रियंका गांधी वाड्रा का 15 मई को शानदार प्रभावी रोड़ शो रहा। समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव और बसपा सुप्रीमो मायावती भी रैली में जल्दी ही आने को है।

लोकसभा चुनाव के सातवें चरण में जिन 59 सीटों पर चुनाव होना है उनमें पूर्वांचल की 13 सीेटें हैं। इन सब पर 2014 में भाजपा का कब्जा था। तब 12 सीटें तो भाजपा को, एक सीट उसकी सहयोगी अनुप्रिय पटेल को मिली। तब सपा,बसपा और कांग्रेस का सफाया हो गया था।

वाराणसी सीट का खासा प्रभाव पूर्वांचल के महराजगंज, गोरखपुर, कुशीनगर, देवरिया, बांसंगांव, धोसी, सलेमपुर, बलिया, गाजीपुर, चंदौली, वाराणसी, मिर्जापुर और राबटर््गंज में 19 मई को मतदान होगा। इनमें भाजपा 11 सीटों पर चुनाव लड़ रहीं है। मिर्जापुर और राबटर््सगंज से उसकी सहयोगी ‘अपना दल’ लड़ रही है। जबकि सपा  आठ और बसपा पांच सीटों पर चुनाव लड़ रही है। कांग्रेस 11 और उसकी सहयोगी जन अधिकार पार्टी एक सीट चंदौली से चुनाव लड़ रही है।

भाजपा को सपा-बसपा से कड़ी चुनौती मिल रही है। तब उन्हें सीट भले न मिली हों लेकिन दूसरे -तीसरे स्थान पर वही थे। 13 में दो-तीन पर कांग्रेस भी कामयाब हो सकती है। प्रधानमंत्री अपनी छह रैलियों को पूरे इलाके में करेंगे और वाराणसी वास करेंगे। भाजपा अध्यक्ष 15 दिन में तीसरी बार वाराणसी आए हैं। प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ लखनऊ बनारस एक किए हुए हैं। अपनी पूरी-ताकत अब भाजपा ने यहां लगी हुई है। पूर्वांचल का यह चुनावी रणक्षेत्र खासा महत्वपूर्ण है। भाजपा और इसके सहयोगी महाबलियों का मुकाबला कांगे्रस अध्यक्ष राहुल गांधी और महासविच प्रियंका गांधी, सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव और बसपा सुप्रीमो मायावती से है।

भाजपा के ही एक सहयोगी दल रहे भारतीय समाज पार्टी के अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर एक महीने पहले ही अलग हुए। भाजपा का ही एक और सहयोगी ‘अपना दल’ भी टूट चुका है। इसका एक हिस्सा कांग्रेस के साथ है। उधर भाजपा ने निषादपार्टी से समझौता कर लिया है।

कांग्रेस की ओर से अजय राय और सपा-बसपा गठबंधन से शलिनी यादव मैदान में हैं। वीएसएफ में रहते हुए, काम करने वाले जवानों को जो खाना दिया जाता है उसकी शिकयत पर बर्खास्त जवान तेज बहादुर भी दोनों पक्षों के हित में प्रचार कर रहे हैं।