अफ्सपा का विरोध

सरकार और सशस्त्र बलों द्वारा प्रदान किये गये तर्क के बावजूद दुर्भाग्यपूर्ण घटना स्पष्ट रूप से अफ्सपा के तहत सशस्त्र बलों को प्रदान की गयी अनंत शक्तियों का परिणाम है। यह अधिनियम वर्तमान में असम, नागालैंड, मणिपुर, अरुणाचल प्रदेश के तीन ज़िलों और असम की सीमा से लगे राज्य के आठ पुलिस स्टेशनों के अधिकार क्षेत्र में आने वाले क्षेत्रों में लागू है। नागालैंड के मुख्यमंत्री, नेफ्यू रियो और मेघालय के मुख्यमंत्री, कोनराड संगमा ने तुरन्त इस अधिनियम को निरस्त करने की माँग की है। यह समझने की ज़रूरत है कि अफ्सपा को बन्द किया जाना चाहिए और अधिनियम के राजनीतिक ग़ुस्से को जन्म देने से पहले इसे निरस्त करने की लम्बे समय से लम्बित माँग को स्वीकार किया जाना चाहिए।

प्राथमिकता यह सुनिश्चित करने की होनी चाहिए कि यह त्रासदी नागालैंड में और अधिक हिंसा और अस्थिरता में न बदल जाए। इस घटना में सरकार और नेशनल सोशलिस्ट काउंसिल ऑफ नगालिम के बीच सौहार्द और नाज़ुक़ नागा शान्ति वार्ता को संकट में डालने की क्षमता है। इस समय एक उच्च स्तरीय राजनीतिक हस्तक्षेप की आवश्यकता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नागालैंड की यात्रा पर विचार कर सकते हैं, और जो हुआ उसके बारे में ख़ेद जताने के साथ आश्वासन से सकते हैं कि सुरक्षा बलों में नागरिकों के विश्वास को बहाल करने के लिए यह फिर से नहीं होगा। निश्चित ही ऐसी पहल राजनीतिक विश्वसनीयता को मज़बूत करेगी और घटना के प्रति पश्चाताप भी वास्तविक लगेगा।

चरणजीत आहुजा