अपनी मानसिकता बदलें बेरोज़गार युवा

इसके अलावा देश में जिस प्रकार से मोबाइल फोन, पैड, लैपटॉप, कम्प्यूटर और इंटरनेट से जुड़ी अन्य एसेसरी की भी भारी माँग है। इस क्षेत्र में भी युवा अपना छोटा-सा मैकेनिकल स्टोर खोलकर अच्छी कमायी कर सकते हैं। आज देश में जिस प्रकार अंग्रेजी और एलोपैथिक दवाइयों का चलन धीरे-धीरे कम हो रहा है और आयुर्वेद का चलन बढ़ता जा रहा है। इससे भी रोज़गार के अवसर बढ़े हैं।

बेरोज़गार युवाओं के लिए इसमें अच्छा अवसर है, क्योंकि आजकल नाड़ी देखकर बीमारी बताने और उसका जड़ से सही इलाज करने वाले सिद्ध वैद्यों का अभाव है। इसी प्रकार पिछले कुछ वर्षों से योग का बाज़ार बढ़ा है, जिसके लिए योगाचार्यों की पूरी दुनिया में बड़े पैमाने पर माँग है। जिन युवाओं के पास खेत हैं, वे जड़ी-बूटियों की खेती कर सकते हैं। भारतीय आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियों की पूरी दुनिया में बहुत माँग है।

बहरहाल आज देश में सबसे अधिक परेशान वे लोग हैं, जो पढ़-लिखकर भी बेरोज़गार हैं। क्योंकि वे कोई छोटा-मोटा पेशेगत कार्य, कारीगरी या हुनरमंद कार्य न करके सिर्फ़ उच्च शिक्षा पाकर नौकरी की उम्मीद में बैठे रह जाते हैं। वे छोटे-मोटे काम, जैसे फल और सब्ज़ी बेचने, अन्य चीज़ों का ठेला लगाने से भी हिचकिचाते हैं। धीरे-धीरे उनकी उम्र और समय हाथ से निकल जाते हैं, उनकी शादी में भी देरी हो जाती है, जिससे बाद में उन्हें पछताना पड़ता है। आज देश में तक़रीबन में 80 फ़ीसदी छोटे स्वरोज़गार वे लोग कर रहे हैं, जो ज़्यादा पढ़े-लिखे नहीं हैं। केवल 15 से 20 फ़ीसदी ही पढ़े-लिखे युवा हैं, जिनके बीच ही नौकरी आदि को लेकर मारामारी मची हुई है।
हालाँकि यह सरकारों की कमी ही कही जाएगी कि इतने कम पढ़े-लिखे युवाओं में से 50 फ़ीसदी को भी वे रोज़गार मुहैया नहीं करा पा रही हैं। लेकिन ऐसे युवा अगर रोज़गार के रूप में केवल नौकरी पाने की राह में बैठे हैं, तो मेरे विचार में उनके शिक्षित होने का कोई अर्थ नहीं है; क्योंकि उनसे ज़्यादा पैसा तो अनपढ़ कमा रहे हैं।

आजकल केवल अधिक पढ़ा-लिखा होना मायने नहीं रखता, बल्कि आपने जीवन में क्या कमाया और आपका जीवन स्तर कितना ऊँचा है; ये बहुत मायने रखता है। यह केवल किसी की इच्छा पर निर्भर करता है कि वह किसी का सेवादार या नौकर बनना पसन्द करता है अथवा स्वयं अपना कारोबार करके ख़ुद मालिक बनना।

केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री रोज़गार योजना के तहत पात्रों को बैंक से 10 लाख तक के ऋण की योजना भी है। इसी तरह अन्य कई योजनाएँ भी ऋण के अनुदान वाली हैं, जो बेरोज़गार युवाओं को अपना व्यवसाय शुरू करने में मददगार साबित हो सकती हैं। इससे बेरोज़गारी भी दूर होगी और युवाओं व उनके माँ-बाप और बाकी परिवार वालों की चिन्ता भी। लिहाज़ा युवाओं को एक हौसले और प्रेरणा की आवश्यकता है।

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार एवं राजनीतिक विश्लेषक हैं।)